Thursday, August 22, 2019

कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में पाकिस्तान की सुनवाई होगी भी या नहीं?

पाकिस्तान ने सार्वजनिक तौर पर संकेत दिए हैं कि वह कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में ले जाने की योजना बना रहा है.

आईसीजे में कश्मीर को संभावित मामला बनाने की मौजूदा वजहें हैं- भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाकर संविधान की ओर से मिले कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया है, इसके बाद पूरे इलाक़े का संपर्क दुनिया से कटा हुआ है और यहां की कुछ ही ख़बरें बाहर की दुनिया तक पहुंच रही हैं.

हालांकि इस संभावित मामले के बारे में अभी बेहद सीमित जानकारी उपलब्ध है लेकिन इस पर बात करने के लिए कुछ मुद्दों को समझना भी जरूरी है.

आईसीजे एक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय है, नाम से ज़ाहिर है यहां देशों के बीच के विवादों का निपटारा किया जाता है. किसी देश की ओर से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करने पर भी मामला न्यायालय के सामने लाया जा सकता है.

लेकिन यह कोई मानवाधिकार न्यायालय नहीं है और व्यक्तिगत तौर पर कोई इस न्यायालय में अपील दाखिल नहीं कर सकता.

आईसीजे में किसी मामले की सुनवाई होने से पहले उसे कई चरणों से होकर गुजरना होता है. इसमें पहला चरण यही है कि यह देखा जाता है कि क्या मामला न्यायालय के दायरे में आता है या नहीं. इससे तय होता है कि मामले की सुनवाई होगी या नहीं.

आम तौर पर दो तरीकों से इसे किया जाता है- पहले तरीके में आर्टिकल 36 (2) के तहत देखा जाता है कि न्यायालय के अनिवार्य अधिकार क्षेत्र या दायरे में क्या क्या आता है. यानी अगर दो देशों के बीच किसी मुद्दे पर विवाद हो तो वे दोनों न्यायालय में अपील कर सकते हैं.

लेकिन कश्मीर और 370 के मसले पर दोनों देशों की अपनी अपनी सीमाएं हैं, जब तक वे इस मामले को अदालत में ले जाने पर सहमत नहीं होते तब तक इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय सुनवाई नहीं कर सकती.

अब बचा दूसरा तरीका जिसके मुताबिक आर्टिकल 36 (1) के तहत यह कहा जाए कि किसी देश ने किसी खास संधि का उल्लंघन किया है, तब इस मसले की सुनवाई आईसीजे में हो सकती है. इसी तरीके के इस्तेमाल से भारत जाधव मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले गया जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने वियना संधि के मुताबिक जाधव को कान्सुअलर की सुविधा मुहैया नहीं कराई.

पहले तरीका जिसमें आर्टिकल 36 के तहत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का अनिवार्य अधिकार क्षेत्र आता है, पर भारत के सहमत होने की कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे में पाकिस्तान को दूसरे तरीके से मामले को उठाना होगा, पाकिस्तान किस संधि के उल्लंघन की बात न्यायालय के सामने रखेगा, यह देखना अभी बाकी है.

वैसे मौजूदा जाधव मामले से अलग भी दोनों देशों के आपसी मसलों की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में हुई है. हालांकि दो ऐसे मामले थे जिनमें सुनवाई शुरुआत स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई थी.

एक मामला तो आईसीएओ काउंसिल के अधिकार क्षेत्र (भारत बनाम पाकिस्तान) था, जिसमें अपील वापस ले ली गई थी. इसके अलावा एक मामला पाकिस्तान के युद्धबंदियों (पाकिस्तान बनाम भारत) का था जिसकी अपील भी वापस ले ली गई थी.

वहीं 10 अगस्त, 1999 की घटना जिसमें भारत के कच्छ क्षेत्र में पाकिस्तानी नौ सेना के पेट्रोल एयरक्राफ्ट को भारत के मिग-21 ने मार गिराया था का मामला भी (पाकिस्तान बनाम भारत) अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचा था लेकिन आईसीजे को पता चला कि यह उनके अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है तो फिर कार्यवाही को समाप्त मान लिया गया था.

कश्मीर का संभावित नया मामला, आईसीजे के उस फैसले के एक महीने के बाद ही आया है, जिसमें 17 जुलाई, 2019 को कुलभूषण जाधव मामले में भारत के पक्ष में फैसला हुआ था. शुरुआत में पाकिस्तान ने यह संकेत दिया था कि वह अदालत के आदेश का पालन करेगा लेकिन नई परिस्थितियों में वह ऐसा करेगा, इसमें संदेह है.

Friday, August 16, 2019

中国经济如果停滞会发生什么

“某一国经济打喷嚏,全球经济就感冒。”这句话曾经用来形容美国对全球的影响,也越来越频繁地用在经历几十年高速增长的中国。

今年二季度,中国经济录得30年来最低的增长,GDP增速只有6.2%。消息一出,立刻成为多个国际媒体的头条。中国对国际经济的影响可见一斑。

如果中国经济出现问题,势必波及其贸易伙伴,但受影响最大的还是中国人。

分析人士称,中国经历罕见的长期增长,繁荣贯穿大多数人的成长历程,因此对经济衰退缺乏心理准备。 中国经济正面临国内外空前的风险和压力,有必要探讨和研究经济放缓甚至停滞的可能和影响。

毫无疑问,中国经济在放缓。相比10年前两位数的勇猛增长的时代,现在的GDP年增长率已经腰斩。

“6.2%的增长,实际上感觉像是2.6%的增长。很多方面都失速。”中国市场研究集团(CMR)董事总经理雷小山(Shaun Rein)向BBC表示,在中国切身感觉经济非常冷,除了零售数据之外,所有数据感觉都很低。

但经济学家和分析师也提醒,对于中国而言,这一数据是三十年来最低,但对大部分国家而言仍难以企及。

世界银行数据显示,在201个国家中,中国的经济增长率排第18名。二十国集团(G20)的GDP占全球经济总量的90%,这些国家里,只有印度(6.98%)经济增长比中国高。

新闻报道中常常忽视的是,6.2%的增速是建立在中国空前巨大的体量之上。《经济学人》称,虽然中国的GDP增速在放缓,但新增的经济体量依然创下新纪录。2018年,中国年经济的增量达到1.4万亿美元,超过整个澳大利亚的经济体量。

雷小山分析,虽然贸易战对中国经济起到了一些负面作用,比如影响了投资和消费的信心。“但并不是中国经济放缓的主要原因。”

路透社引述分析师认为,撇开贸易战,中国经济增长状况的恶化是自身造成的——贸易战爆发的同时,中国在内部控制新增债务增长,导致基础设施支出放缓,民营企业更难获得贷款;加强环境执法也使民企成本上升;以及房价增速放缓,销售萎缩。政府的这些做法都给经济下行增添压力。

在很多经济学家看来,现在中国政府这么做是过去十年“饮鸩止渴”的后果

2008年金融危机之后,中国政府推出四万亿计划,大规模放松信贷。然而,中欧国际工商学院经济学与金融学教授许小年曾表示,中国经济的结构性问题是市场饱和与产能过剩,“四万亿”投下去,又投入到基础设施建设,增添了新的过剩产能,供需失衡进一步加剧,“这是十足的饮鸩止渴”。

中国知名的经济学家吴敬琏也表示,这一举措不但没有降低杠杆,相反进一步杠杆化,一旦有风吹草动,局部的资金链断裂会传导到金融市场的其他部分,引发系统性危机。

Wednesday, August 7, 2019

香港示威浪潮中的撑警派:“警察执法没问题”

香港《逃犯条例》修订争议相关的示威持续,反对修例的团体周六(8月3日)在九龙举行游行的同时,另一个团体在一海之隔的香港岛以“希望明天”为题,举行支持警察执法的集会。大会表示有约9万人出席,警方说最高峰时期集会人数约2.6万。

这是香港特首林郑月娥6月宣布暂缓修订《逃犯条例》后,第四次有支持政府的团体举办大型集会。

《逃犯条订》的修订引起许多后续争议,示威者与警察也爆发过多次冲突,示威者要求林郑月娥完全撤回修例建议,也要求香港政府成立独立委员会调查警民冲突中,警方有没有使用过度武力。

参加支持警察执法集会的人士批评示威者使用暴力争取权利,认为警察执法“没有问题”。当中有中国大陆游客表示,来香港旅游购物,看见集会就进场参加。

主办方“香港政研会”表示没有邀请建制派议员何君尧出席周六的集会,但他最后仍然现身,在台上向参加者发表演说时,希望示威者不要再“搞乱香港”。

BBC中文在现场观察,大部份参加者都集中在舞台前方,可以容纳3.7万多人的集会场地没有站满人,也有一些人选择在草坪旁的地方聚集。许多人都穿着白底红字、写上“保护家园”、“维护法治”的衣服,也有人穿上表达“我爱香港警察”字样的衣服。

其中一位参加集会的李先生接受BBC中文访问时说,他参加集会是要“表达支持”,记者问他支持什么后,他表示是“中国文化”。李先生之后补充,他是支持警察,又认为警察早前驱散示威者的方式“不是属于过份武力”。

另一位手持标语参加集会者对记者说,他从中国大陆来香港旅游购物,经过集会就来参加,希望香港繁荣稳定,但坦言没有太了解近来香港发生的事情。

参加者大多都是中年至老年人,但部份也是年轻人。其中一名大学生陈同学对BBC中文说,他希望集会是希望让香港警察知道,除了一部人责骂他们,也有人支持他们执法。访问期间,旁边一位女士不断称赞陈同学“说得好”。

中国国务院港澳办上月就香港情况罕有地举行记者会,发言人表示希望香港社会各界人士旗帜鲜明地反对和抵制暴力,希望香港社会各界人士坚决守护法治,希望香港社会尽快走出政治纷争,集中精力发展经济、改善民生。

周六的集会前,建制派团体等先后三次举行支持政府的集会,香港基本法委员会委员谭惠珠、建制派政党民建联主席李慧琼、立法会前主席曾钰成等亲北京人物先后出席这些集会,并发表演讲。

但除了立法会议员何君尧外,没有其他建制派的议员和人物出席这次集会。

民建联等多个建制派政党和组织也有为之前的集会宣传,动员自己的支持者出席。但这些政党却没有为“香港政研会”周六维多利亚公园的集会宣传,只有代表香港乡郊组织的乡议局协助安排一些旅游车,接载希望出席集会的人到集会场地。

“香港政研会”向BBC中文指出,这次集会想透过一个音乐会的形式,让普通市民表达意见,因此没有特别邀请官员或议员出席。

但与其他支持政府集会一样,“香港政研会”的活动期间没有提到《逃犯条例》的修订,内容主要针对示威者的暴力行为作出批评,呼吁警方对这些行为要“严正执法”。