Tuesday, January 8, 2019

सवर्णों को आरक्षण पर लोकसभा में चर्चा शुरू; सरकार ने कहा- निजी संस्थानों में भी 10% कोटा लागू होगा

केंद्र ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संविधान संशोधन बिल मंगलवार को सदन में पेश किया। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने इसे पटल पर रखा। इस बिल को बसपा, कांग्रेस, आप और एनसीपी ने समर्थन देने की बात कही है। उधर, डीएमके ने इसका विरोध किया है। लोकसभा में आज विंटर सेशन का आखिरी दिन है। चर्चा की शुरुआत करते हुए गहलोत ने कहा कि यह 10% आरक्षण सभी धर्म के लोगों के लिए है। निजी शैक्षणिक संस्थानों में भी यह आरक्षण लागू होगा।

इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, "सवर्ण आरक्षण के प्रस्ताव का उनकी पार्टी समर्थन करेगी। लोकसभा चुनाव से पहले लिए गया यह फैसला हमें सही नीयत से लिया गया नहीं लगता है। यह चुनावी स्टंट और राजनीतिक छलावा लगता है। अच्छा होता अगर भाजपा सरकार यह फैसला चुनाव के और पहले लेती।" उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के अथक परिश्रम और त्याग के बाद ही गरीब और शोषित वर्ग के दलित और आदिवासियों को आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है। इसलिए एससी-एसटी ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात के हिसाब से आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

आरक्षण के लिए 5 प्रमुख मापदंड :  1. परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रु. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 2. परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। 3. आवेदक के पास 1,000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए। 4. म्यूनिसिपलिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर नहीं होना चाहिए। 5. नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपलिटी में 200 गज से बड़ा घर न हो।

संविधान (124वां संशोधन) बिल 2019 में क्या है?

अभी संविधान में जाति और सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 15, 16 में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। अभी एससी को 15%, एसटी को 7.5% और ओबीसी को 27% आरक्षण दिया जा रहा है।

सरकार संविधान के अनुच्छेद 15 में संशोधन करना चाहती है, जिसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की तरक्की के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार मिलेगा।
विशेष प्रावधान उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश से जुड़े हैं। इनमें निजी संस्थान भी शामिल हैं। फिर भले ही वे राज्यों द्वारा अनुदान प्राप्त या गैर अनुदान प्राप्त हों। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
बिल साफ करता है कि आरक्षण मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगा और प्रत्येक कैटेगरी में कुल सीट का अधिकतम 10% होगा।

नरसिम्हा सरकार समेत 9 राज्यों के फैसले अटके
1991 में केंद्र सरकार ने सवर्णों को 10% कोटा देने का फैसला किया था। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। 2003 में भाजपा, 2006 में कांग्रेस ने इसके लिए मंत्री समूह बनाए थे। आरक्षण की मांग को लेकर मराठा, गुर्जर और जाट जैसे समुदाय लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में 10% आरक्षण के कानून भी बने। लेकिन, संविधान आड़े आ गया था।

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